Diwali Poems in Hindi: Hindi Poems for Diwali 2016

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  • हम पटाखे ,हमारा अस्तित्व क्या ,
    जब तलक बारूद, तब तक जान है
    कोई चकरी की तरह है नाचता ,
    कोई उड़ कर छू रहा आसमान है
    कोई रह जाता है होकर फुस सिरफ ,
    जिसमे दम है वो है बम सा फूटता
    फूल कोई फुलझड़ी से खिलाता,
    कोई है अनार बन कर छूटता
    पटाखे ,इंसान में एक फर्क है ,
    आग से आता पटाखा रंग में
    और इन्सां रंग दिखाता उम्र भर ,
    आग में होता समर्पित अंत में.
  • फूटे हुए पटाखे हम है
    सूखी लकड़ी मात्र नहीं हैं,हम खुशबू वाले चन्दन है
    जहाँ रासलीला होती थी,वही पुराना वृन्दावन है
    कभी कृष्ण ने जिसे उठाया था अपनी चिट्टी ऊँगली पे,
    नहीं रहे हम अब वो पर्वत,अब गोबर के गोवर्धन है
    हरे भरे और खट्टे मीठे , अनुभव वाली कई सब्जियां ,
    मिला जुला कर गया पकाया ,अन्नकूट वाला भोजन है
    बुझते हुए दीयों के जैसी ,अब आँखों में चमक बची है,
    जब तक थोड़ा तेल बचा है,बस तब तक ही हम रोशन है
    ना तो मन में जोश बचा है,ना बारूद भरा है तन में,
    जली हुई हम फूलझड़ी है,फूटे हुए पटाखे,बम है.
  • पर्व है पुरुषार्थ का,
    दीप के दिव्यार्थ का,
    देहरी पर दीप एक जलता रहे,
    अंधकार से युद्ध यह चलता रहे,
    हारेगी हर बार अंधियारे की घोर-कालिमा,
    जीतेगी जगमग उजियारे की स्वर्ण-लालिमा,
    दीप ही ज्योति का प्रथम तीर्थ है,
    कायम रहे इसका अर्थ, वरना व्यर्थ है.
  • आशीषों की मधुर छांव इसे दे दीजिए,
    प्रार्थना-शुभकामना हमारी ले लीजिए!!
    झिलमिल रोशनी में निवेदित अविरल शुभकामना
    आस्था के आलोक में आदरयुक्त मंगल भावना!!!
  • जगमग सबकी मने दिवाली
    …आनन्द विश्वासजगमग सबकी मने दिवाली,
    खुशी उछालें भर-भर थाली।खील खिलौने और बताशे,
    खूब बजाएं बाजे ताशे।ज्योति-पर्व है,ज्योति जलाएं,
    मन के तम को दूर भगाएं।दीप जलाएं सबके घर पर,
    जो नम आँखें उनके घर पर।

    हर मन में जब दीप जलेगा,
    तभी दिवाली पर्व मनेगा।

    खुशियाँ सबके घर-घर बाँटें,
    तिमिर कुहासा मन का छाँटें।

    धूम धड़ाका खुशी मनाएं,
    सभी जगह पर दीप जलाएं।

    कोई कोना ऐसा हो ना,
    जिसमें जलता दीप दिखे ना।

    देखो, ऊपर नभ में थाली,
    चन्दा के घर मनी दिवाली।

    देखो, ढ़ेरों दीप जले हैं,
    नहीं पटाखे वहाँ चले हैं।

    कैसी सुन्दर हवा वहाँ है,
    बोलो कैसी हवा यहाँ है।

    सुनो, पटाखे नहीं चलाएं,
    धुआँ, धुन्ध से मुक्ति पाए।

    …आनन्द विश्वास

Also See: Happy Diwali Poems in English

  • जिस आगन में दिखे अंधेरा, वहीं पे दीप
    जलाना,
    जिस घर नहीं जला हो चूल्हा, तुम भोजन
    पहुंचाना.
    जो मुस्काना भूल गए, उन होठों को
    मुस्काना,
    जिन आंखों ने देखे सपने, तुम सच कर
    दिखलाना.
    जिसने मीठा स्वाद चखा न, उसे मिठाई
    खिलाना,
    दीन दुखी आंखों के आंसू, पोंछ के तुम
    हर्षाना.
    भूल गए जो कदम राह, तुम उनको राह
    दिखाना.
    ऐसा यदि कर सके तो, समझो सच हुआ दीप

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